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*सीबीएन इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव की रिमांड खत्म: आधिकारिक नामों पर सस्पेंस, पिपलियामंडी के 'दलाल' एलआईसी एजेंट के काले साम्राज्य की खुली पोल*नीमच। पटना सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किए गए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स के इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव की अंतिम रिमांड अवधि आज समाप्त हो गई है। रिमांड खत्म होने के बाद जांच एजेंसी सीबीआई की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी अन्य बड़े अधिकारी, सफेदपोश या दलाल के नाम की पुष्टि नहीं की गई है। इस सस्पेंस ने जहां एक ओर कई भ्रष्ट अधिकारियों की सांसें अटका रखी हैं, वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले की आंच अब नीमच-मंदसौर जिले की सीमा पर स्थित पिपलियामंडी के एक बड़े और कुख्यात सिंडिकेट तक पहुंच चुकी है।जांच एजेंसियों की रडार और स्थानीय सूत्रों से अब एक ऐसे रसूखदार एलआईसी एजेंट का नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आया है, जिसने मालवा अफीम बेल्ट के काश्तकारों की नाक में दम कर रखा था और पूरे इलाके में लूट का एक समानांतर सिस्टम खड़ा कर दिया था। बता दें कि पूर्व में उजागर हुए अवस्थी और अन्य दलालों के नेटवर्क से जुड़कर यह नया और शातिर दलाल इलाके में अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग और अफीम किसानों के घोर आर्थिक शोषण का मुख्य केंद्र बन चुका है।*फोटोकॉपी की आड़ में फर्जी स्टाम्प और काले धन का गोरखधंधा*प्राप्त और पुख्ता जानकारी के अनुसार, पिपलियामंडी का यह दलाल मुख्य रूप से एक एलआईसी एजेंट के रूप में अपनी पहचान बताता है, लेकिन यह सिर्फ एक मुखौटा है। मुख्य बाजार में स्थित इसकी फोटोकॉपी की दुकान असल में फर्जी और अवैध स्टाम्प बनाने का सबसे बड़ा काला अड्डा बनी हुई है। यह व्यक्ति भ्रष्ट अधिकारियों के साथ साठगांठ कर तोड़-बट्टे में इतनी महारत हासिल कर चुका है कि इलाके के बड़े-बड़े तस्कर और दलाल भी इसकी कार्यप्रणाली के आगे नतमस्तक हैं।इसका आर्थिक तंत्र बेहद शातिराना है। अवैध वसूली और एनडीपीएस के नाम पर डराकर ऐंठे गए काले धन को यह दलाल सीधे अपनी दुकान पर मंगवाता है। इसके बाद, इस अवैध नकदी को वैध रूप देने के लिए यह एलआईसी या बिरला जैसी नामी कंपनियों की बीमा पॉलिसियों का सहारा लेता है। किसानों के लूटे गए पैसे से डमी या अन्य नामों पर पॉलिसियां की जाती हैं, जिससे इसका काला धन व्हाइट तो होता ही है, साथ ही इस पूरी प्रक्रिया में यह कंपनियों से मोटा कमीशन भी डकारता है। इस तरह यह दोनों हाथों से चांदी काट रहा है।*एनडीपीएस का खौफ दिखाकर किसानों से करोड़ों की उगाही*इस पूरे सिंडिकेट का सबसे खौफनाक और घिनौना पहलू इसका वह तरीका है, जिससे यह सीधे-सादे किसानों को निशाना बनाता है। यह दलाल खुलेआम सीबीएन के वरिष्ठ और भ्रष्ट अधिकारियों के साथ अपनी गहरी पैठ और उठने-बैठने की कसमें खाता है। अफीम किसानों को मार्फीन की मात्रा कम बताने, पट्टे कटवाने या अवैध तस्करी के मामलों में उलझाने की धमकी दी जाती है। इसका सबसे बड़ा और अचूक हथियार है— झूठे एनडीपीएस केस में फंसाने का डर है।एनडीपीएस कानून की गंभीरता और इसमें जमानत के मुश्किल प्रावधानों का खौफ दिखाकर यह किसानों से रातों-रात लाखों रुपये की अवैध वसूली करता है। विभागीय सूत्रों और दबी जुबान में बताया जा रहा है कि इस वसूली का एक बहुत बड़ा हिस्सा हवाला या नकद रूप में ऊपर बैठे इसके मुंहलगे आकाओं तक भी नियम से पहुंचता है। ऊपर तक बंधी हुई इसी मोटी रकम और भ्रष्ट हिस्सेदारी के चलते, फर्जी स्टाम्प छापने से लेकर किसानों को खुलेआम लूटने तक, इस दलाल पर आज तक कोई आंच नहीं आई और यह खुद को कानून से ऊपर समझने लगा।*पीड़ितों ने की लामबंदी, उच्च अधिकारियों तक जाएगी बात*पाप का घड़ा जब भरता है, तो बगावत तय होती है। लंबे समय से इस दलाल की ब्लैकमेलिंग, धमकियों और आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे अफीम काश्तकार अब पूरी तरह से आर-पार के मूड में आ गए हैं। इस फर्जी व्यक्ति के बुने जाल में फंसकर अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई, खेत-खलिहान और लाखों रुपये गंवा चुके कई किसानों और पीड़ितों ने अब एकमत होकर इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।दलाल के चंगुल से बर्बाद हो चुके इन पीड़ितों ने गुपचुप तरीके से बैठकें कर यह तय किया है कि वे इस दलाल की सभी अनैतिक गतिविधियों, फोटोकॉपी की आड़ में फर्जी स्टाम्प के काले कारोबार, मनी लॉन्ड्रिंग और सीबीएन अधिकारियों के नाम पर की गई करोड़ों की उगाही के पुख्ता सबूत जुटाएंगे। ऑडियो रिकॉर्डिंग, लेन-देन के साक्ष्य और पीड़ितों के शपथ पत्रों के साथ अब सीधे दिल्ली स्थित पीएमओ, वित्त मंत्रालय, नारकोटिक्स कमिश्नर ग्वालियर और सीबीआई के उच्च अधिकारियों से इसकी लिखित और सप्रमाण शिकायत करने की ठोस रणनीति तैयार कर ली गई है।*दलालों और सफेदपोशों में मचा भारी हड़कंप*भले ही आज पटना सीबीआई की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद आधिकारिक तौर पर कोई नया नाम सार्वजनिक न किया गया हो, लेकिन जांच की आंच अंदर ही अंदर सुलग रही है। पिपलियामंडी के इस दलाल की पोल स्थानीय स्तर पर खुलने के बाद इलाके के अन्य छोटे-बड़े दलालों में भारी हड़कंप मच गया है। कई दलाल तो भूमिगत होने की फिराक में हैं। किसानों की इस लामबंदी और उनके द्वारा सबूतों के साथ की जा रही तैयारी के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि सीबीआई और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का अगला शिकंजा बहुत जल्द इस दलाल और इसे सालों से संरक्षण देने वाले उन सफेदपोश अधिकारियों पर भी कसा जाएगा, जो पर्दे के पीछे से बैठकर अफीम बेल्ट में लूट का यह पूरा काला साम्राज्य चला रहे थे।

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