*नकली शराब के कारोबार पर बड़ा सवाल!**सागर कांड के बाद मंदसौर में भी खतरे की घंटी, कार्रवाई के बावजूद कथित अवैध ठिकानों पर कब गिरेगी गाज?**हिम्मत सिंह चौहान*मंदसौर। सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पूरे प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। मंदसौर जिले में भी पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा लगातार दबिश देकर अवैध शराब, महुआ लहान और कच्ची शराब नष्ट करने की कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई में अवैध शराब निर्माण से जुड़ी सामग्री बरामद होने की खबरें सामने आई हैं।लेकिन इन कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिले में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक प्रशासन पहुंच पा रहा है?सूत्रों का दावा है कि जिले के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में कच्ची शराब के साथ कथित रूप से नकली शराब के निर्माण और खपाने का नेटवर्क भी सक्रिय है। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्थानों पर राजनीतिक संरक्षण की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।*किराना दुकान जैसी आसानी से मिल रही ‘पोटलियां’?*ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से शराब की छोटी-छोटी पोटलियों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अवैध शराब खुलेआम उपलब्ध हो रही है तो निगरानी तंत्र आखिर क्या कर रहा है?दूसरी ओर, आबकारी विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद सवाल यह भी है कि छोटे विक्रेताओं तक कार्रवाई सीमित है या फिर बड़े सप्लायर और निर्माण स्थलों तक भी जांच पहुंच रही है?*सागर कांड ने चेताया, अब मंदसौर की बारी?*सागर की जहरीली शराब त्रासदी के बाद प्रशासन ने अवैध शराब के खिलाफ सख्ती का अभियान शुरू किया है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रकरण दर्ज होने और शराब जब्ती की कार्रवाई की जा रही है।मंदसौर में भी पिछले दिनों अवैध भट्टियों और लहान के खिलाफ कार्रवाई हुई है। ऐसे में अब जरूरत सिर्फ छिटपुट कार्रवाई की नहीं, बल्कि अवैध शराब के निर्माण से लेकर परिवहन और बिक्री तक की पूरी चेन को खंगालने की है। यदि जिले में वास्तव में ऐसे बड़े ठिकाने सक्रिय हैं, जिनकी जानकारी स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारों तक पहुंच रही है, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या विभाग को इन ठिकानों की जानकारी नहीं है या फिर निगरानी व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक है?
byAll State News 24
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