*4 फरवरी को समाजसेवी अशोक अरोरा पर हुआ था कातिलाना हमला**सुप्रीम कोर्ट से सुपारी किलर को मिला बड़ा झटका: अशोक अरोरा पर हमले के मुख्य आरोपी शाद उर्फ शाहिद को 14 दिन में करना होगा सरेंडर, HC का फैसला पलटा*नीमच। 4 फरवरी 2024 की वो खौफनाक शाम नीमच के लोग शायद ही कभी भूल पाएं। सरेआम गोलियों की गूंज से पूरा शहर सहम गया था। निशाना थे नीमच के समाजसेवी अशोक अरोरा, लेकिन इस खूनी खेल का अंजाम इतना भयानक था कि ताबड़तोड़ फायरिंग में शूटरों ने अपने ही साथी बाबू फकीर को ढाई फीट से गोली मार दी थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।इस बहुचर्चित 'सुपारी किलिंग' मामले में अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने अपराधियों और उनके आकाओं की नींद उड़ा दी है।दरअसल, इस खौफनाक वारदात के मुख्य आरोपी शाद उर्फ शाहिद मंसूरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। इतने गंभीर मामले में मुख्य आरोपी का यूं बाहर आ जाना हर किसी को हैरान कर रहा था। लेकिन जब पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो जजों ने केस की फाइल देखते ही सख्त रुख अपना लिया।*सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की क्लास लगा दी*जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के फैसले को सिरे से पलट दिया। सर्वोच्च अदालत ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा, "यह सड़क पर हुई कोई मामूली हाथापाई नहीं है, बल्कि एक आदतन अपराधी द्वारा की गई 'सुपारी किलिंग' है। इतने गंभीर अपराध में जमानत देकर हाईकोर्ट ने बहुत बड़ी कानूनी भूल की है।"सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हाईकोर्ट ने बाकी आरोपियों से तुलना कर मुख्य आरोपी को जमानत देने का जो तर्क दिया है, वह पुलिस की चार्जशीट और सबूतों के बिल्कुल उलट है।*अब बच निकलने का कोई रास्ता नहीं*चूंकि इस केस में अभी गवाहों के बयान और ट्रायल बाकी हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कोई रियायत नहीं दी। अदालत ने शाहिद मंसूरी को सीधा अल्टीमेटम दिया है कि उसे हर हाल में अगले दो हफ्ते (14 दिन) के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना होगा।सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े फैसले ने साफ कर दिया है कि अपराध कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून के हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं। इस फैसले से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ित परिवार और नीमच की जनता को एक बड़ी राहत मिली है।
byAll State News 24
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